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Kayan ki zindegi part 4

Friends,,  जब जब सोचता हूँ ये कहानी आगे बढाऊँ, तब मुझे एक डर सा लगा रहता है। क्यों कि kyan जेसा प्यारा सा बच्चा की ज़िंदगी मे इतना कठोर situation आया था कि मैं  खुद सहम जाता हूँ सोचते सोचते। उसकी ज़िंदगी ठहरा हुआ पानी जेसा था। देढ़  साल  से वो खुदको ऐसे बनाया था कि जेसे आसपास  उसकी ज़िंदगी से उसको कोई मतलब नहीं था। वो खुद बस जीना तब तक चाहता है जब तक  की वो  जी सकता है।उसको इच्छा नहीं था जीने को but वो बेमन से जी रहा था। उसको अब  ना कोई खुसी की चाहत है , ना कोई गम की फिकर है।अब जो ज़िंदगी ने उसको ठोकर मारा है, उसे और ज्यादा गम क्या मिल सकता है ।  चाहत नहीं थी कुछ खुसीकी और ना वो वो खुस रहने केलिए कुछ करना चाहता था। बस जो चल रहा है उसको चलने दे रहा था।  अब फिर आया kayan की ज़िंदगी की एक और दौर,, जहां kayan खुद से लड़ेगा अपनी ज़िंदगी को आगे बढ़ने के लिए। Kayan उसकी एक classmate frnd Pritika के साथ स्कूल की गेट से बाहर निकला ही था घर अनेको।  दोनो हाथ में cycle लेके  पैदल चल ही रह थे कुछ बात करके  । गेट से 4कदम निकला ही था कि उसकी कदम ...